सागर लक्ष्मी का R&D सफर विज्ञान से प्रेरित, नवसंचार से चलित, भरोसे से मजबूत
1984 से सागरलक्ष्मी ने कृषि क्षेत्र में वैज्ञानिक दृष्टिकोण और निरंतर नवसंचार के साथ अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई है। अनुसंधान और विकास (R&D) हमारी वृद्धि का केंद्र बिंदु है, जो हमें गुणवत्तापूर्ण और विश्वसनीय समाधान प्रदान करने में सक्षम बनाता है।
दूरदर्शी नेतृत्व और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के संयोजन से कंपनी ने शुरुआत से ही एक मजबूत अनुसंधान आधार तैयार किया। 1987 में ICRISAT के साथ शुरू हुए शोध सहयोग ने बाजरा अनुसंधान में नए अवसर पैदा किए और उत्पादन क्षमता में गुणात्मक सुधार लाया।
दूरदर्शी नेतृत्व और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के संयोजन से कंपनी ने शुरुआत से ही एक मजबूत अनुसंधान आधार तैयार किया। 1987 में ICRISAT के साथ शुरू हुए शोध सहयोग ने बाजरा अनुसंधान में नए अवसर पैदा किए और उत्पादन क्षमता में गुणात्मक सुधार लाया।
इन सहयोगों के माध्यम से सागरलक्ष्मी को उन्नत जर्मप्लाज्म (Germplasm), प्रीमियम परीक्षण सामग्री, विशेषज्ञ मार्गदर्शन और फसल सुधार के लिए आधुनिक तकनीक प्राप्त हुई है।
ICRISAT Hybrid Parent Research Consortium – सदस्यता
अनुसंधान क्षमता में महत्वपूर्ण मजबूती
सागरलक्ष्मी के अनुसंधान और विकास (R&D) क्षेत्र को नई ऊंचाइयों पर ले जाने वाला एक महत्वपूर्ण कदम था – ICRISAT के Hybrid Parent Research Consortium की सदस्यता प्राप्त करना।
इस सदस्यता से कंपनी को विभिन्न फसलों में नए हाइब्रिड और बेहतर किस्में विकसित करने के लिए एक मजबूत वैज्ञानिक आधार और सहयोग मिला। इसके परिणामस्वरूप निम्नलिखित फसलों के विकास में उल्लेखनीय प्रगति हुई:
R&D यूनिट स्थापना और मान्यता
3 जुलाई 2002 को सागरलक्ष्मी परिवार में आधिकारिक तौर पर R&D यूनिट की स्थापना की गई, जो कंपनी के वैज्ञानिक विकास में एक महत्वपूर्ण आधारशिला साबित हुई।
इस यूनिट को बाद में भारत सरकार के DSIR (वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान विभाग), नई दिल्ली द्वारा मान्यता प्राप्त हुई, जो सागरलक्ष्मी की अनुसंधान गुणवत्ता और विश्वसनीयता का प्रतिबिंब है।
संयुक्त रिसर्च से मिलने वाले लाभ
हमारे वर्ल्ड-क्लास R&D का आधार
वैश्विक स्तर के कार्यक्षेत्र का विकास
हमारे अत्याधुनिक R&D यूनिट में उपलब्ध प्रमुख सुविधाएँ: